कैथोलिक चर्च के द्वारा मदर टेरेसा के लिए

डिम्बग्रंथि चमत्कार निर्मित !

 सनल इडामारुकू

हिन्दी अनुवादक : दीपाली सिन्हा

मदर टेरेसा

मोनिका बेसरा

कई लोग ये नहीं जानते कि कैथोलिक चर्च किसी व्यक्ति को संत ,उसके नाम से हुए 'चमत्कार' की योग्यता के आधार पर बनाते हैं । यही कारण है कि लगभग १०००० संतों के करीब २००००  चमत्कारो को चर्च के चमत्कार  व्यापार ने मंजूरी दे दी है !

मदर टेरेसा को भी इस कसौटी से निकलने के बाद ही संत बनाया गया है। और उसके लिए, चर्च ने उसके नाम से 'चमत्कार' का निर्माण किया ।

कहानी कुछ इस प्रकार से चलती है ,एक महिला अर्थात् मोनिका बेसरा को डिम्बग्रंथि ट्यूमर था।  उसके पेट पर मदर टेरेसा की एक तस्वीर रखी गयी और प्रार्थना की गयी, तब चमत्कार हुआ ! ट्यूमर जादुई तरह से गायब हो गया : वेटिकन ने इस दावे को एक चमत्कार के रूप में मंजूरी दी । उसके साथ  ही मदर टेरेसा के संत बनने के दरवाजे खुल गए थे। 

 

 बेसरा का  डिम्बग्रंथि ट्यूमर ,क्या  वास्तव में मदर टेरेसा की तस्वीर उसके पेट पर  रखने से उसकी अलौकिक शक्तियों के कारण  ठीक हो गया था? मिशनरीज ऑफ चैरिटी का कहना है कि ऐसा हुआ है । वेटिकन ने आधिकारिक रूप से इस कहानी को प्रथम श्रेणी चमत्कार के दर्जे में रखने की मंजूरी दी है। इस तरह बेतुके और खतरनाक दावों पर कानूनी कार्रवाई करना ज़रूरी है। इंडियन रेशनलिस्ट एसोसिएशन, जिन्होंने मदर टेरेसा के इस दावे को दुत्कारा है ,उन्होंने पश्चिम बंगाल की सरकार से मिशनरीज ऑफ चैरिटी को झूठे दावे के लिए अदालत में ले जाने की मांग की थी । 

 

चमत्कार निर्माताओं को कानून की किसी भी अदालत मे कोई जगह  नहीं है । उनके गवाह चुप रहने की प्रतिज्ञा लिए होते हैं, ताकि एक दूसरे के बयान से कोई विरोधी बात सामने ना आ पाए ।  उनके प्रामाणिक कर्ता गुमनाम और अनुसरणीय हैं। उनके सबूत स्पष्ट रूप से  फ़र्ज़ी  हैं । और इन  सब से ऊपर मुख्य गवाह गायब हो चुका है ।

 

वेटिकन के अनुसार, मोनिका बेसरा का डिम्बग्रंथि ट्यूमर, टेरेसा का चित्र, उसके पेट पर रखने से उसकी शक्तियों के कारण  ठीक हो गया था। लेकिन मेडिकल रिकॉर्ड से साबित होता है कि उसके जीवन को पारंपरिक चिकित्सा उपचार से ही  बचाया गया था। पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री सूर्य कांता मिश्रा का कहना है “२१ वीं सदी में आप  चमत्कार उपचार के बारे में  कैसे बात  कर सकते हैं ”? चमत्कार प्रलेखन का दावा है कि कई डॉक्टरों ने इस चिकित्सा को वैज्ञानिक दृष्टि  से  प्रमाणित किया है ।  लेकिन इन गुमनाम गवाहों का अब तक पता नहीं लग पाया है। जब पश्चिम बंगाल के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री पार्थो डे को पता चला तो उन्होंने वेटिकन एजेंटों से संपर्क किया और किसी चिकित्सक का नाम पूछा ,जो यह प्रमाणित कर सके कि "मोनिका बेसरा की चिकित्सा एक चमत्कार थी "। उन्होंने इस मामले को समर्थन देने से मना कर दिया। फरवरी २००० मैं (कलकत्ता) स्वास्थ्य विभाग को इस मामले  के लिए जाँच के आदेश दिए गए। जाँच के बाद ये आश्वस्त किया गया कि ट्यूमर के ठीक होने का कारण लंबे समय तक चली चिकित्सा उपचार के अलावा कुछ भी असामान्य नहीं था । 

अथक प्रयासों के साथ उन्हें  संत बनाने की टोपी बुनी गयी।  मुख्य जांचकर्ता ब्रायन कोलोडिशूक  के नेतृत्व में वेटिकन के चमत्कार एजेंटों ने मदर टेरेसा की अलौकिक क्षमता प्रामाणित करने के लिए कई उदाहरण पेश किये गए । ३४००० से अधिक पृष्ठों को बड़े करीने से अलंकृत कर, दस्तावेज की एक फाइल बना कर  वेटिकन को भेजी गये। इस आधार पर उनकी  केननिज़ैषण महज एक औपचारिकता बन गयी  है और इस तरह अलबेलिया में जन्मी यह नन संतो के इतिहास में शामिल हो गयी जो कैथोलिक चर्च के इतिहास में सबसे तेजी से संत बनी  |

 

उन बंडल में ज्यादातर उन असाधारण दावों के महत्वपूर्ण चमत्कार है, जो टेरेसा ने कथित तौर पर  पहली पुण्यतिथि पर किये थे । संत बनने के लिए कम से कम एक  चमत्कार मृत्यु के बाद सिद्ध होना ज़रूरी है । टेरेसा के प्रबंधकों ने इस उद्देश्य के लिए "मोनिका बेसरा की हीलिंग" की पेशकश की और वेटिकन ने आधिकारिक तौर पर संत के  लिए एक उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में यह स्वीकार कर लिया है। लेकिन अप्रत्याशित रूप से चमत्कार को एक कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा । सच्चाई पर से पर्दा हटने से यह एक बनावटी नाटक की तरह नज़र आने लगा |

डॉ मंजू मारशेड ने बताया जो  बालुरघाट में सरकारी अस्पताल की अधीक्षक है , कि मोनिका बेसरा को गंभीर दर्द के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वे क्षयरोग दिमागी बुखार से ग्रसित थी और एक अल्ट्रा साउंड जांच के दौरान पता चला था की उन्हें एक डिम्बग्रंथि ट्यूमर भी है बाद में डॉ तरुण  कुमार बिस्वास और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ रंजन मुस्तफी  द्वारा इलाज किया गया था।  बाद में उन्होंने वह  अस्पताल छोड़ दिया, और उनका इलाज उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में जारी रखा जो मार्च १९९९में सफलतापूर्वक समाप्त हो गया था। अंतिम अल्ट्रा साउंड जांच में  ट्यूमर गायब हो गया था  |

वेटिकन के 'सबूत' के एक अहम् गवाह मोनिका बेसरा का एक बयान अत्यंत गोपनीयता के बावजूद, प्रेस में लीक हो गया । बेसरा ने बयान में बताया  वह  ट्यूमर के भयानक दर्द से पीड़ित थी और लगभग सभी ने आशा खो दी थी । फिर उसने परिवार को छोड़ दिया और  कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की  मदद ली। ५अक्टूबर १९९८ को मदर टेरेसा की पहली पुण्यतिथि पर उसने सबसे पहले प्रार्थना की। दो नन और बहन बारथोलोमिया और सेविका ने एक रजत पदक लिया जिसमे टेरेसा  की तस्वीर थी उसे, मोनिका के पेट पर  एक काले धागे के साथ बाँध दिया । दर्द एक ही रात में गायब हो गया और वापस कभी नहीं आया । उसका पेट छोटा होता गया और सुबह में उसे लगा कि ट्यूमर गायब हो गया । वह चमत्कारिक ढंग से  ठीक हो गयी थी |

मोनिका बेसरा एक 30 वर्षीय आदिवासी अनपढ़ महिला है जो दुलीदनापुर गांव में रहती है और जब तक वो एक ईसाई नहीं थी  केवल आदिवासी मातृभाषा, टूटी हुई  बंगाली के कुछ शब्द ही बोल पाती थी । लेकिन उसका बयान धाराप्रवाह अंग्रेजी में लिखा है और उसके विवरण से उसका केथोलिक के प्रति विश्वास और उनके साथ अतरंगता का पता चलता है। यह स्पष्ट है कि बयान उसके द्वारा नहीं लिखा गया है  या उसके द्वारा तय नहीं किया गया है। लेकिन मोनिका बेसरा बदली कहानी में प्रकाश लाने के लिए मौजूद नहीं है, वह गायब हो गयी है । उनके करीबियों को  "चर्च के संरक्षण के अंतर्गत" होने का  संदेह है। उसे देखा नहीं गया , बाद में  गोपनीयता की तमाम कोशिशों के बावजूद उसका नाम सार्वजानिक हो गया।

 चमत्कार को गुप्त रखने में नन भी शामिल थी। कोलकाता के आर्कबिशप डिसूजा बताते हैं " ये चमत्कार हुआ है “।' बहने किसी भी तरह का बयान देना नहीं चाहती क्योंकि वे बयान के विभिन्न संस्करणों से बात को ख़राब करना नहीं चाहती’|

इंडियन रेशनलिस्ट एसोसिएशन का साफ़ रूप से कहना है कि स्पष्ट धोखाधड़ी सब लोंगो के सामने नहीं लाया गया और यदि इस चमत्कारी चिकित्सा के विचार को बल मिलता रहा तो यह अशिक्षित और गरीबों  के लिए खतरनाक परिणाम होगा । आधुनिक चिकित्सा और विज्ञान के क्षेत्र में आत्मविश्वास विकसित और मज़बूत होना चाहिए और लोंगो को अंधविश्वास और चमत्कार  पर विश्वास करने बजाय  उपचार के लिए उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।  आधुनिक चिकित्सा को समाज के सभी वर्गों तक पहुँचाने के लिए अथक प्रयास होने चाहिए |

Read the original in English: Catholic Church Manufactured an Ovarian Miracle for Mother Teresa.

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